गुरुवार, 11 अप्रैल 2019

दुनिया में नए मनुष्यों को आने से पहले सोचना पड़ेगा और सोचना चाहिए उन्हें भी जो दुनिया में नए मनुष्यों को लाने की क्षमता रखते हैं

हे उत्पादन के योग्य युवाओं!
दुनिया क्या सचमुच इतनी साफसुथरी इतनी संसाधन पूर्ण रह गयी है कि किसी बच्चे को इतनी प्रदूषित और समस्याओं से भरी हुई दुनिया आने के लिए विवश किया जाए। 

गर्व से कहो कि मैं एक राष्ट्रवादी हिन्दू मर्द हूँ

भारत में हिन्दू होना एक प्रिविलेज है और उस पर भी मर्द/पुरुष होना दोहरा प्रिविलेज है, संघ/बीजेपी की परिभाषा का राष्ट्रवादी होना तिहरा प्रिविलेज । राष्ट्रवादी हिन्दू मर्द कुछ भी बोल सकता है कुछ भी लिख सकता है।

मंगलवार, 27 दिसंबर 2016

गरीब का जिन्दा रहना बहुत जरुरी है

सारी कल्याण योजनाएं, गरीबों को जिन्दा रखने की कोशिशें हैं,
गरीब मर गया तो रैलियों में कौन आएगा, तालियां कौन बजायेगा,
हमारे घरों के चौक बर्तन, हमारे  शौचालय से सड़क तक की सफाई, हमारे खेत से फैक्ट्री तक का काम कौन करेगा,
हमारे लिए लड़ेगा कौन, हमारी गाड़ी कौन चलायेगा .
उफ़, क्या क्या नहीं बिगड जाएगा गरीबों के बिना
गरीब का ज़िंदा रहना बहुत जरुरी है .

Debit/Credit cards

कार्ड्स (डेबिट या क्रेडिट) के माध्यम से या फोन बैंकिंग के माध्यम से भुगतान करने का नुक्सान ये है कि
हमारे अपने पैसे पर हमें किसी को भुगतान के लिए बिचौलिया बनाना पड़ता है, बिचौलिए को दलाली/कमीशन भी देना पड़ता है, अगर लेनदेन में कोई भ्रम पैदा हुआ तो महीने भर के लिये धन बिचौलिए के खाते की शोभा बढ़ाता है और बिचौलिया उस पर ब्याज कमाता है या उसे किसी बिजनेस में लगाता है और उस अवधि में हमें अपने बचत खाते में उतने ब्याज की हानि भी उठानी पड़ती है . इसके अलावा कार्ड की सालाना फीस देनी पड़ती है, सर्विस चार्जेज और सर्विस टैक्स भी देना पड़ता है जो हमारे द्वारा कार्य वस्तु या सेवा के अतिरिक्त होता है,
अगर सरकार वास्तव में कैशलेस वित्तीय लेनदेन को बढ़ावा देना चाहती है तो इनाम विनाम छोड़िये, केवल कार्ड्स की सालाना फीस, और सर्विस चार्जेज को स्थाई रुप से समाप्त करे और बीच की संस्थाओं को बाध्य करे कि वो विवादित धनराशि पर साधारण ब्याज अदा करे, व्यापारी के धन संग्रहण से उसे कमीशन मिलता ही है, उसी में सब्र करे, कस्टमर्स को बख्स दे .

नाम पर क्या जाना

जयचंद नाम तो आज भी बहुतों का है, अशोक ने तो लाखों का खून बहाया था और कितने ही और नाम हैं जिन्होंने खून बहाया या गद्दारी की,  

हम सब से ज्यादा सभ्य लोग हैं

हम भारत के लोग दुनिया की सबसे पुरानी  सभ्यताओं में से एक हैं, हमने अच्छे बुरे सब दिन देखे है और हम ये सब देखते देखते समझ गए हैं कि सब मिथ्या है, हम स्वच्छता अभियान को असफल कर सकते हैं, क्योंकि सफाई मिथ्या है, अंत में सब मिटटी ही हो जाना है, राख हो जाना है,
हम अहिंसक वैसे ही नहीं हो गए, हमने देखा है, क्रांतियां होती हैं, सफल होती दिखती हैं और सफल होने के बाद भी कुछ नहीं बदलता केवल सत्ता परिवर्तन होता है, व्यवस्था नहीं बदलती, चेरी छोड़ न हुइहें रानी, का भाव हमारा स्थायी भाव है, हम बुद्ध को भगवान मान सकते हैं लेकिन अपने घर के पुत्र या पति या भाई को संन्यासी गृह त्यागी नहीं होने दे सकते, हम भगत सिंह को सर्वोच्च सम्मान देने को तैयार हैं लेकिन अपने किसी पुत्र या भाई को उस रास्ते पर चलने नहीं देंगे,
हम चाहते हैं कि कोई हमारे सारे दुःख हर ले, कोई इस व्यवस्था को बदल दे, पर हमें कुछ न करना पड़े .
हमें अतीत पर सदा गर्व रहता है।