मंगलवार, 27 दिसंबर 2016

हम सब से ज्यादा सभ्य लोग हैं

हम भारत के लोग दुनिया की सबसे पुरानी  सभ्यताओं में से एक हैं, हमने अच्छे बुरे सब दिन देखे है और हम ये सब देखते देखते समझ गए हैं कि सब मिथ्या है, हम स्वच्छता अभियान को असफल कर सकते हैं, क्योंकि सफाई मिथ्या है, अंत में सब मिटटी ही हो जाना है, राख हो जाना है,
हम अहिंसक वैसे ही नहीं हो गए, हमने देखा है, क्रांतियां होती हैं, सफल होती दिखती हैं और सफल होने के बाद भी कुछ नहीं बदलता केवल सत्ता परिवर्तन होता है, व्यवस्था नहीं बदलती, चेरी छोड़ न हुइहें रानी, का भाव हमारा स्थायी भाव है, हम बुद्ध को भगवान मान सकते हैं लेकिन अपने घर के पुत्र या पति या भाई को संन्यासी गृह त्यागी नहीं होने दे सकते, हम भगत सिंह को सर्वोच्च सम्मान देने को तैयार हैं लेकिन अपने किसी पुत्र या भाई को उस रास्ते पर चलने नहीं देंगे,
हम चाहते हैं कि कोई हमारे सारे दुःख हर ले, कोई इस व्यवस्था को बदल दे, पर हमें कुछ न करना पड़े .
हमें अतीत पर सदा गर्व रहता है। 

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