मंगलवार, 27 दिसंबर 2016

Debit/Credit cards

कार्ड्स (डेबिट या क्रेडिट) के माध्यम से या फोन बैंकिंग के माध्यम से भुगतान करने का नुक्सान ये है कि
हमारे अपने पैसे पर हमें किसी को भुगतान के लिए बिचौलिया बनाना पड़ता है, बिचौलिए को दलाली/कमीशन भी देना पड़ता है, अगर लेनदेन में कोई भ्रम पैदा हुआ तो महीने भर के लिये धन बिचौलिए के खाते की शोभा बढ़ाता है और बिचौलिया उस पर ब्याज कमाता है या उसे किसी बिजनेस में लगाता है और उस अवधि में हमें अपने बचत खाते में उतने ब्याज की हानि भी उठानी पड़ती है . इसके अलावा कार्ड की सालाना फीस देनी पड़ती है, सर्विस चार्जेज और सर्विस टैक्स भी देना पड़ता है जो हमारे द्वारा कार्य वस्तु या सेवा के अतिरिक्त होता है,
अगर सरकार वास्तव में कैशलेस वित्तीय लेनदेन को बढ़ावा देना चाहती है तो इनाम विनाम छोड़िये, केवल कार्ड्स की सालाना फीस, और सर्विस चार्जेज को स्थाई रुप से समाप्त करे और बीच की संस्थाओं को बाध्य करे कि वो विवादित धनराशि पर साधारण ब्याज अदा करे, व्यापारी के धन संग्रहण से उसे कमीशन मिलता ही है, उसी में सब्र करे, कस्टमर्स को बख्स दे .

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